लोकपाल योजना

अंतिम अपडेट: 30 सितंबर 2026

परिचय

रेस्पो फाइनेंशियल कैपिटल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी अधिनियम 2013 के प्रावधानों के अंतर्गत निगमित एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है, जिसका कॉर्पोरेट पहचान संख्या (CIN) U65990MH2021PTC373655 है (“रेस्पो”/ “कंपनी”)। रेस्पो भारतीय रिज़र्व बैंक (“RBI”) द्वारा पंजीकृत और विनियमित एक बेस लेयर गैर-जमा स्वीकार करने वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (“NBFC”) है, जिसका पंजीकरण क्रमांक N-13.02461 है।

रेस्पो फाइनेंशियल कैपिटल प्राइवेट लिमिटेड असुरक्षित व्यक्तिगत ऋण प्रदान करने के व्यवसाय में संलग्न है।

RBI ने अपने द्वारा विनियमित संस्थाओं के ग्राहकों के हित में अपनी मौजूदा तीन ओम्बड्समैन योजनाओं, अर्थात् (i) बैंकिंग लोकपाल योजना 2006; (ii) गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए ओम्बड्समैन योजना 2018; और (iii) डिजिटल लेनदेन के लिए ओम्बड्समैन योजना 2019 को रिज़र्व बैंक – एकीकृत ओम्बड्समैन योजना 2026 (‘योजना’) में एकीकृत कर दिया है, जो निःशुल्क, अधिक सरल और ग्राहकों के प्रति अधिक उत्तरदायी वैकल्पिक विवाद निवारण तंत्र प्रदान करती है।

इस दस्तावेज़ में योजना के संचालन संबंधी पहलुओं के सामान्य दिशानिर्देश दिए गए हैं। अधिक जानकारी के लिए हितधारक एकीकृत ओम्बड्समैन योजना 2026 (‘योजना’) देखें : https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/content/pdfs/SCHEME16012026_A.pdf

परिभाषाएँ:

“अधिकृत प्रतिनिधि” का अर्थ है अधिवक्ता के अतिरिक्त कोई व्यक्ति (जब तक कि अधिवक्ता स्वयं पीड़ित व्यक्ति न हो), जिसे RBI ओम्बड्समैन के समक्ष कार्यवाही में शिकायतकर्ता का प्रतिनिधित्व करने के लिए विधिवत रूप से लिखित में नियुक्त और अधिकृत किया गया हो।

“निर्णय (Award)” का अर्थ है योजना के खंड 15 के अंतर्गत RBI ओम्बड्समैन द्वारा विनियमित संस्था को निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपने दायित्वों के विशिष्ट निष्पादन के लिए जारी किया गया निर्देश;

“शिकायत” का अर्थ है विनियमित संस्था की ओर से सेवा में कमी का आरोप लगाते हुए उसके ग्राहक या उसके अधिकृत प्रतिनिधि द्वारा प्रस्तुत किया गया और योजना के प्रावधानों के अंतर्गत राहत मांगने वाला लिखित अभ्यावेदन;.

“ग्राहक” का अर्थ है वह व्यक्ति जो विनियमित संस्था द्वारा प्रदान की जाने वाली किसी सेवा का उपयोग करता है या उसके लिए आवेदक है;

“सेवा में कमी” का अर्थ है किसी ऐसी सेवा में कोई कमी या अपर्याप्तता जो विनियमित संस्था को कानूनी रूप से या अन्यथा प्रदान करनी आवश्यक है और जिसके परिणामस्वरूप ग्राहक को वित्तीय हानि या क्षति हो भी सकती है और नहीं भी;

“अस्वीकृत शिकायतें” का अर्थ है वे शिकायतें जो योजना के खंड 16 में निर्दिष्ट प्रावधानों के अंतर्गत बंद की गई हैं।

“समझौता” का अर्थ है योजना के खंड 14 के अंतर्गत प्रक्रियाओं का परिणाम।

रिज़र्व बैंक – एकीकृत ओम्बड्समैन योजना 2026 की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
  • योजना के अंतर्गत ग्राहक द्वारा शिकायत दर्ज करने के आधार

    कंपनी के किसी कार्य या चूक के कारण सेवा में कमी से पीड़ित कोई भी ग्राहक योजना के अंतर्गत व्यक्तिगत रूप से या अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से शिकायत दर्ज कर सकता है।

  • शिकायत की स्वीकार्यता के आधार
    • योजना के अंतर्गत शिकायत तभी स्वीकार्य होगी जब निम्नलिखित शर्तें पूरी हों:
      • शिकायत सीधे RBI ओम्बड्समैन को संबोधित हो। हालांकि, इसमें ऐसा संचार शामिल नहीं है जिसमें RBI को केवल प्रतिलिपि में अग्रेषित/चिह्नित किया गया हो (चाहे ई-मेल द्वारा या भौतिक रूप में); और
      • शिकायत शिकायतकर्ता द्वारा व्यक्तिगत रूप से या अधिवक्ता के अतिरिक्त किसी अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से दर्ज की गई हो, जब तक कि अधिवक्ता स्वयं पीड़ित व्यक्ति न हो; और
      • शिकायतकर्ता योजना के खंड 11 में निर्दिष्ट पूरी जानकारी प्रदान करता हो; और
      • शिकायत अपमानजनक, तुच्छ या परेशान करने वाली प्रकृति की न हो; और
      • शिकायतकर्ता ने योजना के अंतर्गत शिकायत करने से पहले कंपनी के पास लिखित में या किसी अन्य माध्यम से शिकायत की हो, जिसका प्रमाण शिकायतकर्ता प्रस्तुत कर सके; और
      • कंपनी को शिकायत प्राप्त होने के बाद शिकायतकर्ता को 30 दिनों के भीतर या RBI, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा या कार्ड नेटवर्क दिशानिर्देशों के अंतर्गत, यदि कोई हो, निर्दिष्ट समय के भीतर, जो भी अधिक हो, कोई उत्तर प्राप्त न हुआ हो; या शिकायतकर्ता कंपनी द्वारा दिए गए उत्तर / समाधान से संतुष्ट न हो; और
      • शिकायत RBI ओम्बड्समैन को उस तिथि से 90 दिनों के भीतर की गई हो जिस दिन उप-खंड (1)(f) में निर्दिष्ट समय-सीमा समाप्त होती है या कंपनी के अंतिम संचार की तिथि से, जो भी बाद की हो; और
      • शिकायत उसी शिकायत से संबंधित न हो जो पहले से RBI ओम्बड्समैन कार्यालय के समक्ष लंबित है, चाहे वह उसी शिकायतकर्ता से प्राप्त हुई हो या एक या अधिक शिकायतकर्ताओं के साथ; या
      • शिकायत उसी शिकायत से संबंधित न हो जो पहले ही RBI ओम्बड्समैन कार्यालय द्वारा निपटाई जा चुकी है या जिस पर गुण-दोष के आधार पर विचार किया जा चुका है, चाहे वह उसी शिकायतकर्ता से प्राप्त हुई हो या एक या अधिक शिकायतकर्ताओं के साथ; और
      • शिकायत उसी शिकायत से संबंधित न हो जो पहले से किसी न्यायालय, अधिकरण या मध्यस्थ या किसी अन्य न्यायिक या अर्ध-न्यायिक मंच के समक्ष लंबित है, चाहे वह उसी शिकायतकर्ता से प्राप्त हुई हो या एक या अधिक शिकायतकर्ताओं के साथ; या
      • शिकायत उसी शिकायत से संबंधित न हो जो पहले ही किसी न्यायालय, अधिकरण या मध्यस्थ या किसी अन्य न्यायिक या अर्ध-न्यायिक मंच द्वारा निपटाई जा चुकी है या जिस पर गुण-दोष के आधार पर विचार किया जा चुका है, चाहे वह उसी शिकायतकर्ता से प्राप्त हुई हो या एक या अधिक शिकायतकर्ताओं के साथ; और
      • कंपनी से की गई शिकायत ऐसे दावों के लिए परिसीमा अधिनियम 1963 के अंतर्गत निर्धारित परिसीमा अवधि की समाप्ति से पहले की गई हो।स्पष्टीकरण 1: उपर्युक्त उप-खंड (1)(j) और (1)(k) के प्रयोजनों के लिए, उसी शिकायत से संबंधित शिकायत में किसी न्यायालय या अधिकरण के समक्ष लंबित या निर्णीत आपराधिक कार्यवाही या किसी आपराधिक अपराध में शुरू की गई कोई पुलिस जांच शामिल नहीं है।
    • निम्नलिखित मामलों से संबंधित शिकायतें योजना के दायरे से बाहर हैं:
      • कंपनी के व्यावसायिक निर्णय या विवेक से संबंधित मामले;
      • किसी विक्रेता और कंपनी के बीच विवाद;
      • कंपनी के प्रबंधन या कार्यकारी अधिकारियों के विरुद्ध शिकायतें;
      • किसी न्यायिक/अर्ध-न्यायिक या वैधानिक या कानून प्रवर्तन प्राधिकरण के आदेशों के अनुपालन में कंपनी की किसी कार्रवाई से उत्पन्न शिकायत;
      • ऐसी सेवा जो RBI के विनियामक दायरे में नहीं आती;
      • विनियमित संस्थाओं के बीच विवाद;
      • कंपनी के कर्मचारी-नियोक्ता संबंध से जुड़ा विवाद;
      • ऐसी शिकायत जिसके लिए क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनीज़ (विनियमन) अधिनियम 2005 की धारा 18 में उपचार प्रदान किया गया है; और
      • कंपनी के ऐसे ग्राहकों से संबंधित शिकायत जो योजना में शामिल नहीं हैं।
    • जो शिकायतें उप-खंड (1) में निर्दिष्ट पात्रता शर्तों को पूरा नहीं करतीं और जो शिकायतें उप-खंड (2) में उल्लिखित हैं, उन्हें शिकायतकर्ता को उचित सूचना देकर बिना आगे जांच के प्रारंभ में ही अस्वीकार्य मानकर अस्वीकृत कर दिया जाएगा।
  • शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया
    • शिकायत पोर्टल https://cms.rbi.org.in के माध्यम से ऑनलाइन दर्ज की जा सकती है।
    • शिकायत ई-मेल द्वारा crpc@rbi.org.in पर या RBI द्वारा अधिसूचित केंद्रीकृत प्राप्ति एवं प्रसंस्करण केंद्र को भौतिक रूप में भी प्रस्तुत की जा सकती है। यदि शिकायत भौतिक रूप में प्रस्तुत की जाती है, तो उस पर शिकायतकर्ता या अधिकृत प्रतिनिधि के विधिवत हस्ताक्षर होने चाहिए। इलेक्ट्रॉनिक या भौतिक माध्यम से प्रस्तुत की गई शिकायत योजना के अनुबंध – II में निर्दिष्ट प्रारूप में होनी चाहिए।
योजना के अनुसार ओम्बड्समैन निर्णय कैसे लेता है?
  • शिकायतों की प्रारंभिक संवीक्षा ओम्बड्समैन द्वारा की जाएगी
  • यदि आवश्यक हो तो ओम्बड्समैन द्वारा अतिरिक्त जानकारी मांगी जाएगी
  • ओम्बड्समैन के समक्ष कार्यवाही संक्षिप्त प्रकृति की होती है और यह साक्ष्य के किसी नियम से बाध्य नहीं होगी।
  • ओम्बड्समैन सुलह या मध्यस्थता के माध्यम से शिकायतकर्ता और रेस्पो के बीच आपसी सहमति से शिकायत के निपटारे को बढ़ावा देगा।
  • यदि उपर्युक्त सहमति नहीं बन पाती है, तो ओम्बड्समैन शिकायत को स्वीकार या अस्वीकार करते हुए, ऐसा निर्णय/आदेश पारित करने के कारणों सहित, निर्णय/आदेश पारित कर सकता है।
  • यदि कोई ग्राहक ओम्बड्समैन के निर्णय से संतुष्ट नहीं है, तो वह निर्णय/आदेश या शिकायत की अस्वीकृति की सूचना प्राप्त होने की तिथि से 30 (तीस) दिनों के भीतर RBI के उपभोक्ता शिक्षा एवं संरक्षण विभाग के प्रभारी कार्यकारी निदेशक के समक्ष निर्णय/आदेश के विरुद्ध अपील दायर कर सकता है।
  • रेस्पो निर्णय पत्र प्राप्त होने की तिथि से 30 (तीस) दिनों के भीतर निर्णय के विरुद्ध अपील कर सकती है, सिवाय कंपनी द्वारा दस्तावेज़ों/जानकारी प्रस्तुत न करने के मामले में।
  • ‘निर्णय (Award)’ में संबंधित NBFC द्वारा विशिष्ट निष्पादन का निर्देश शामिल होता है। इसमें शिकायतकर्ता को हुई हानि, यदि कोई हो, के लिए मुआवज़े के भुगतान का निर्देश शामिल हो भी सकता है और नहीं भी। ओम्बड्समैन को ऐसा निर्णय पारित करने की शक्ति नहीं होगी जिसमें शिकायतकर्ता को हुई वास्तविक हानि या INR 3000000 (तीस लाख भारतीय रुपये), जो भी कम हो, से अधिक राशि के भुगतान का निर्देश हो। इसके अतिरिक्त, ओम्बड्समैन शिकायतकर्ता को समय की हानि, किए गए खर्च, उत्पीड़न और मानसिक पीड़ा को ध्यान में रखते हुए INR 300000 (तीन लाख भारतीय रुपये) से अधिक न होने वाला मुआवज़ा भी प्रदान कर सकता है।
नोट:
  • ओम्बड्समैन किसी भी चरण में शिकायत को अस्वीकार कर सकता है।
  • ओम्बड्समैन योजना एक वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र है।
  • ग्राहक अपने विवादों के निवारण के लिए किसी भी चरण में किसी अन्य न्यायालय/मंच/प्राधिकरण से संपर्क करने के लिए स्वतंत्र है।
निर्णय को कैसे लागू किया जाएगा?

रेस्पो शिकायतकर्ता के साथ हुए समझौते या ओम्बड्समैन द्वारा पारित निर्णय के अंतिम होने पर उसे लागू करेगी और निर्णय के अंतिम होने के 15 (पंद्रह) दिनों के भीतर इस संबंध में RBI ओम्बड्समैन को एक रिपोर्ट भेजेगी।

अनुबंध – I

रेस्पो के नोडल अधिकारियों का विवरण, जिनसे ग्राहक रिज़र्व बैंक – एकीकृत ओम्बड्समैन योजना 2026 के अनुसार संपर्क कर सकते हैं, और RBI ओम्बड्समैन का विवरण नीचे दिया गया है:

ग्राहक द्वारा संपर्क किए जाने वाले रेस्पो के नोडल अधिकारी का नाम और संपर्क विवरण
क्र. सं.नामसंपर्क विवरणक्षेत्रकार्यालय का पता
1.श्री स्वप्निल किनालेकर022-28256467, nodal@respo.co.inसंपूर्ण भारत

कंपनी का नाम: रेस्पो फाइनेंशियल कैपिटल प्राइवेट लिमिटेड.

चौथी मंज़िल, डायना बिज़नेस पार्क, स्ट्रीट नंबर 1, एमआईडीसी, अंधेरी (पूर्व), मुंबई 400093

यदि नोडल अधिकारी द्वारा 30 (तीस) दिनों की अवधि के भीतर शिकायत का निवारण नहीं किया जाता है, तो शिकायतें निर्धारित प्रारूप में (RBI की वेबसाइट पर उपलब्ध – https://cms.rbi.org.in) दर्ज की जा सकती हैं या भौतिक रूप में यहाँ भेजी जा सकती हैं

‘केंद्रीकृत प्राप्ति एवं प्रसंस्करण केंद्र

भारतीय रिज़र्व बैंक

चौथी मंज़िल, सेक्टर 17

चंडीगढ़ – 160017

RBI संपर्क केंद्र – 14448

योजना की एक प्रति RBI की वेबसाइट और CMS पोर्टल (https://cms.rbi.org.in) पर उपलब्ध है।

योजना के अधिक विवरण के लिए कृपया [www.rbi.org.in](https://www.rbi.org.in) & respo.co.in देखें।